
जिज्ञासा कभी कम नहीं होती
न पच्चीस की उम्र में।
न पैंसठ की उम्र में।
न पचासी की उम्र में।
2. उनकी पसंद का कुछ ढूँढें।
सुकून भरी दोपहर से लेकर नए अनुभवों और सार्थक बातचीत तक, ऐसा कार्यक्रम चुनें जो उनके अनुकूल हो।
हर आगामी सभा व्हाट्सएप पर साझा की जाएगी, ताकि जुड़े रहना आपके लिए आसान रहे।
हम सब चाहते हैं
कहीं अपनापन मिले,
कोई साथ हँसने वाला हो,
और कुछ ऐसा हो जिसका इंतज़ार रहे।
इसीलिए तो बना है
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शायद
दिन अब एक जैसे
ही नज़र आने लगे हैं।
शायद आपकी दुनिया
बिना आपके जाने ही
थोड़ी सिमट सी गई है।
शायद अभी भी कुछ कहानियाँ
कहनी बाकी रह गई हैं।
शायद कुछ ऐसी जगहें हैं
जहाँ आप अब भी जाना चाहते हैं।
शायद आप अभी भी
नए लोगों से मिलने के लिए तैयार हैं
जो आपका जीवन बदल सकें।
शायद उम्र बढ़ने का
यह मतलब कभी नहीं था कि
खामोश हो जाना पड़े।
ज़रिया में आपका स्वागत है।
एक ऐसी जगह जहाँ नई शुरुआत की कोई उम्र नहीं होती।
हम लोगों को सिर्फ व्यस्त रखने की कोशि श नहीं कर रहे।
हम उन्हें लोगों से, उनके लक्ष्य से और उनके उस हिस्से से जोड़े रखने की कोशिश कर रहे हैं जो आज भी जिज्ञासु है।
सोच-समझकर आयोजित सभाओं के माध्यम से, हम एक ऐसी जगह बना रहे हैं जहाँ बुजुर्ग समाज दोस्ती निभाना, नए शौक ढूँढना और जीवन के इस अध्याय में खुशियाँ पाना जारी रख सके।
हर माँ-बाप के पास कुछ ऐसा हो जिसका उन्हें इंतज़ार रहे।
और हर बच्चे को यह जानकर सुकून मिले कि वे खुश हैं।
ज़रिया की शुरुआत: